माँ.....

जिसके आँचल की छाया में, बचपन मेरा बिता है।
जिसकी उंगली पकड़ कर, चलना मैंने सीखा है।
जिसने शिक्षा दी मुझको, हर बुरे काम से बचने की।
जिसने शिक्षा दी है मुझको, सही मार्ग पर चलने की,
विपदाएं कितनी भी आये, न उनसे घबराना।
सारि खुशियां दी है मुझको, सारे जहां से लाकर।
धन्य हुआ मेरा जीवन, ऐसी माँ पाकर।


लेखक: दीपिका सोलंकी पटेल
http://bit.ly/deepikasolanki

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