मेरी मंजिल
मिली धुप ही धुप,कही न छाव मिली।
संघरसो से ही मुझे पहचान मिली।
पग पग पर मरे कदमो ने खाई ठोकर,
ठोकरों से ही कदमो को मंजिल आसान मिली।
सुख दुख तो जीवन में आते है,दुःख जीवन में थोड़े आंसू दे जाते हे।
चलना मेरा काम है, क्योकि जीवन गतिमान हे।
जीवन की गति के साथ चलो तो हेर मंजिल आसान है।
ऐ जिंदगी दिल छोटा नहीं हुआ अभी मेरा, मेरे दिल में अभी जान और बाकि हे।
वो इंसान ही क्या जो मुस्किलो से हर जाए,
मेरे वजूद में इंसान और बाकि हे।
मन की हॉट से जकड़ी हुई हु में अभी,
पर मुझमे भी अरमान और बाकि हे।
ऐ आसमां कितना छोटा लग रहा है तू,
मेरी बुलंदी की उड़ान और बाकि हे।
ये तो मंजर हे मिल रहे हे रस्ते जो और अभी,
मेरे इस सफर का मुकाम और बाकि हे।
Written By:Deepika Solanki Patel
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