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माँ.....

जिसके आँचल की छाया में, बचपन मेरा बिता है। जिसकी उंगली पकड़ कर, चलना मैंने सीखा है। जिसने शिक्षा दी मुझको, हर बुरे काम से बचने की।

Pyaar Ho Jaaye......

Chale Jo Do Kadam Jo Saath Uske, To Uske Saath Se Pyaar Ho Jaye.  Thaame Jo Pyaar Se Haath Mera, Apne Haath Se Pyaar Ho Jaaye.  Jo Pukare Pyaar Se Mera Naam, To Apne Naam Se Pyaar Ho Jaaye.

मेरी मंजिल

मिली धुप ही धुप,कही न छाव मिली। संघरसो से ही मुझे पहचान मिली। पग पग पर मरे कदमो ने खाई ठोकर, ठोकरों से ही कदमो को मंजिल आसान मिली। सुख दुख तो जीवन में आते है,दुःख जीवन में थोड़े आंसू दे जाते हे। चलना मेरा काम है, क्योकि जीवन गतिमान हे। जीवन की गति के साथ चलो तो हेर मंजिल आसान है। ऐ जिंदगी दिल छोटा नहीं हुआ अभी मेरा, मेरे दिल में अभी जान और बाकि हे। वो इंसान ही क्या जो मुस्किलो से हर जाए, मेरे वजूद में इंसान और बाकि हे। मन की हॉट से जकड़ी हुई हु में अभी, पर मुझमे भी अरमान और बाकि हे। ऐ आसमां कितना छोटा लग रहा है तू, मेरी बुलंदी की उड़ान और बाकि हे। ये तो मंजर हे मिल रहे हे रस्ते जो और अभी, मेरे इस सफर का मुकाम और बाकि हे। Written By:Deepika Solanki Patel

नारी शक्ति | इस दुनिया पर उस ईश्वर का अधिभार हे नारी | Woman Power || Deepika Solanki Patel

कौन कहता है, इस दुनिया में समाज में नारी का आधार नहीं। आँखे खोल कर देखो, दुनिया में नारी बिन कोई समाज ही नहीं। कौन कहता है नारी का कोई मन नहीं, पत्थरो से टकराती धरा से पूछो, उसकी गति का किसी को अनुमान नहीं। कभी माँ बनकर आँसू पोंछे, कभी बीवी बनकर साथ चली, कभी बहु बनकर रस्मो को निभाती और कभी बेटी बनकर खुशियां दे जाती है नारी। एक कदम पीछे छूट जाए भी तो, खुद आगे बढ़कर समाज को आगे बढ़ाती है नारी। इस धरा से उस अम्बर तक की, हर गौरवगाथा का अभिमान हे नारी। जीवन के रंगमंच का विश्वासपात्र आधार है नारी। समाज के पेड़ों का करुणामयी आभार हे नारी, सृष्टि के अस्तित्व की पहचान है नारी। किसी के करुंक्रन्द का प्रमाण है नारी, इस दुनिया पर उस ईश्वर का अधिभार हे नारी। Written By: Deepika Solanki Patel https://www.instagram.com/deepikasolankipatel/ https://www.facebook.com/deepikasolanki01

मेरा रब, मेरी माँ

रब भी तू हे, सब भी तू हे, में दरिया तू सागर हे। तन भी तू हे,मन भी तू हे, में प्यासी तू गागर हे। तू ममता की सिंधी सोंधी,मंद बयार हे माँ, तू मेरा प्रथम फर हे माँ। प्रेम सुधा बरसाने वाली, तू अनुपम सी मूरत हे, हर विपदा को दूर करे,वो सच्ची निश्छल सूरत हे, सक्छम नहीं में लिखू तुझपे,तू अपार हे माँ, तू ही मेरा प्रथम प्यार है माँ। कृन्दन करती ,जी भर रोती, तुझे पास जब पाव ना, तू जागती थी, सारी रात के,जागकर में दर जाऊ ना, तू मेरी निःस्वार्थ प्रेमी, तू मेरा सारा संसार हे माँ, तू ही मेरा प्रथम प्यार है माँ। जब बचपन में मुझसे,कोई बड़ी सी गलती होती थी, गुस्से में तू मुझे मारकर,फिर चुपके चुपके खिड़ रोटी थी, जब भी ज्यादा नींद लगे तो,में तेरी गोदी में सो जाती थी, हर प्रभात की प्रभा में जागकर माँ आवाज लगाती थी, लहरे भी तू,नाविक भी तू,तू ही पतवार हे माँ, तू मेरा प्रथम प्यार है माँ। Written By:Deepika Solanki Patel

मेरा प्यार

बस तू ही तू, हर ख्वाब मेरा, तू ही जमीं , तू ही आसमां मेरा। जाऊ कहा, अब में तुझे छोड़कर, बता मुझे मेरे,दिलबर अब तू जरा। तेरी साँसों में, मेरी साँसे हे इसतरह, दरिया का पानी किनारो में सिमटा हे जिसतरह। सागर की लहरों में हे,मोंजो सा उफान भरा, तेरी बाँहो में बीते, ये पूरा जीवन मेरा। होंटो से कुछ बोलू, तो बस नाम तेरा, हर धड़कन सुनाती हे , बस पैगाम तेरा। तू रूप, तू रंग, तू ही सांज सृंगार मेरा, मेरी चाहतों में बसा है,बस अरमान तेरा। Witten By: Deepika Solanki Patel

प्यार का एहसास

रिस्ता उसका मुझसे अधूरा है कोई, कभी तो सपनो से हकीकत में उत्तर लूंगा।आज चाहें वो कहानी है कोई, कल अरमानो से सजा कर दुल्हन बना लूंगा। पायल की छनकार घर,आँगन में दौड़ेंगी, अपनी इस दास्ताँ को हकीकत बना लूंगा। रंग बिरंगी,धुंधली सी तस्वीर हे वो कोई, कभी सपनो से भी सुन्दर मूर्त बना लूंगा। आज मोह्हबत, चाहत है वो मेरी, कल जिंदगी से भी कीमती साँसे बना लूंगा। रिस्ता उसका मुझसे अधूरा है कोई, कभी तो सपनो से हक्किक्ट में उतार लूंगा। Written By: Deepika Solanki Patel

बाल दिवस

सही परवरिश हो बच्चों की,सबको पूरा प्यार मिले। सबको मिले जरुरी शिक्षा ,साधन और संस्कार मिले। तन पर कपडा सर पर छत हो, रोटी का इंतजाम रहे, शोषणमुक्त सभी बच्चे हो, न कोई लाचार मिले। जात पात मजहब की बातें, बच्चो से सब दूर रहे, मिलजुलकर सब रहे देश में,ऐसा सुख संसार मिले। अत्याचार न हो बच्चो पर,कभी कही अन्याय न हो, सबको मिले जरुरी चीजे,पुरे निज अधिकार मिले। सूरज चंद बनकर चमके,जग में रोशन नाम करे, सब सुख साधन मिले जरुरी,इनको अपना आधार मिले। बच्चे हो परेसान कही तो ,बल दिवस बैमानी हे सबके पास खुशियां हो, हर बच्चे को प्यार मिले। हस्ते खेलते रहे सदा सब,बच्चो की मनमानी हो,हर दिन इनका बल दिवस हो,सबको दुआ दुलार मिले। Written By: Deepika Solanki Patel 

हौसला

हर पल बढेगे न कभी रुकेंगे। सांसे थाम भी जाए ,पर रहो पर न हम रुकेंगे। न डरते हे किसी समाज से, किसी इंसान से। हम बदलते हे अपनी किस्मत,अपनी ही पहचान से। हर डूबते सूरज के साथ,अँधेरा सा छा जाता है। उंगति किरणों का नया पल,उम्मीदे जीवन में लाता है। डूबने भी लगे जिंदगी की कश्ती,डर कर साहिलों या तुफानो से, पर पार लगाएंगे उस कस्ती को भवर से, अपने साहस अपने बलिदानो से। जो टूटने लगे कभी हिम्मत,डर कर जो किसी अनजान से, न झुकेंगे,ना हारेंगे,किसी भी हालात से। लड़ेगे हर पल,हर पल हम बढेगे, अपनी ताकत,और अपने अभिमान से। Written by: Deepika Solanki Patel Fb.com/deepikasolanki01

Save Girl - Save World

Aaj man fir udaas he, na jane man me kya kuchh khyaal he. Dhundti hu me kitne jawab aas-pas, man m aaj fir kyo itne sawal he. Me kali thi ma ke pet me aur aksar sochti thi, hogi pyar se bhari khubsurat duniya bhar. Jab is duniya me aungi pankh pasar udd jaungi. Chhu lungi aasman ko aur apna naam banaugi. Achanak ek din ek aawaj suni, jo beti hui to hamesha jhukna hoga khusi me bhi rona hoga. Tab man me socha koy aisa kaha gaya kyo aisa socha gaya. Kya beti hona paap he agar nhi, to fir kyo janm se hi pakshpaat he. Jab umar khelne padne ki aayi to kyo duniya ki najro me aayi. Har kahi har bar kyo shoshan hota raha sab kuch jan ke bhi samaj kyo dekhta raha. Mujhme bhi khwahishe thi, bhawnaye thi, samman tha. Fir kyo samaj apni ichhaon pe tolta raha. Kahi devi aur maa banan ke puja gaya, Or kahi meri aabru ko pero tale rondha gaya. Kahi dharm aur riti riwaj per bali chadi or kahi samaj ke naam pe mera gala ghota gaya.. Written By- Deepika Solanki

Adhuri Kahani Hu Mai Bina Pyaar Tere

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Valentines Day Special Adhuri Kahani Hu, Mai Bina Pyaar Tere. Zindgi Hasin He Jab Ho Har Pal Tu Sath Mere. Tu pyar ka pancchhi banke mere dil ki jami par utra, Har pal mera sath de k eek rishta sa joda. Kabhi jharne sa kal kal to, kabhi thandi hawa ka jhonka, Kabhi dhup me mera saya banke, har kadam mere sath chalta. Teri Baahon Me Mehfuj Hu Duniya Se Jaha, Lagta He Do Jahan Se Nirala Ehsaas Waha. Teri Sanse Chhuti H Meri Saanso Ko Istarah, Mahkati He Bahare Phulo Se Milkar Jis Tarah. Tu Sunhari Dhoop He Din Ki, Mai Aons Ki Bund Subah Ki. Tu Baarish Ki Timtimati Bunde, Mai Pyasi Dharti Barso Ki. Tu Ek Khubsurat Dhalti Sham, Mai Aash Hu Naye Din Ki. Adhuri Kahani Hu, Mai Bina Pyaar Tere. Zindgi Hasin He Jab Ho Har Pal Tu Sath Mere…. Written By: Deepika Solanki

Kaun Ho Tum

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Kaun Ho Tum Jo Bhor Ki Pahli Kiran Ke Sath, Meri Band Palko Ko Hole Se Chum Jate Ho... Mere Pavo Ke Taluo Ko Hatho Se Gudgudate Ho, Mere Kapalo Ko Apne Hontho Se Chum Jate  Ho... Mast Pawan Se Jhum Jate Ho.. Mandir Ki Ghantiyo Ki Tarah Tuntuna Kar, Bhor Hone Ki Pyari Si Khabar De Jaate Ho... Khushboo Se Mahkate Ho Meri Saanso Me, Meri Dhadkan Me Har Roj Tum Dhadkate Ho... Dhoop Ke Saaye Jab Mere Jism Ko Jalate He, Badli Ban Rimjhim Se Baras Jate Ho... Ho Jati Hu Kaid Apne Hi Khayalo Me, Raat Ke Andhere Me Joognu Se Chamak Jate Ho... Kabhi Saath Nibhaate Ho Pati Ki Tarah, Aur Kabhi Premi Se Ruth Jate Ho... Kuchh To Batao Kaun Ho Tum, Jo Har Waqt Mujhe Satate Ho... Written By: Deepika Solanki

Kabhi Iss Sine Se Lakar Iski Saanse To Pad

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Kabhi Iss Sine Se Lakar Iski Saanse To Pad, Inme Sirf Khamoshiya Hi Nazar Aayengi... Khamoshio Se Nikalti Dhadkane Teri Hi Geet Gungunayegi, Kahegi Tumse Tu Khwaab Hai Mera, In Baahon Me Simat Ja... Door Rahkar Bhi Mujhse,  Mere Sapno Me Apne Rang Bhar Jaa... Written By: Deepika Solanki

Naari

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आज उसने अम्बर धरा को प्रयत्नो की सीढ़ी से मिलाया हे। फिर भी ये समाज उसके महत्व को न समझ पाया हे। आज बार बार घिर जाती हे वह दूषित नज़रो से उसकी आबरू रोंधी जाती हे ना जाने कितने कदमो से। निर्दोष होकर भी न जाने कितने दर्द सहती हे। दर्द का हर आँसू मन की गंगा में डुबो देती हे। उसकी  ख़ामोशी को कमजोरी न समझना, क्यूंकि संत सागर का संकेत होता हे तूफान का आना। इस तूफान के समक्ष फिर कोई न टिक पायेगा ओऱ ऐसे समाज का अश्तित्व भी नष्ट हो जायेगा। कुप्रथाओ की आह ने उसे कितना झुलसाया हे , ना जाने उसकी आजादी पर कितने ही पूर्णविरामो का साया हे। ना जाने सामाजिक बंधनो ने उसे कितना जकडया हे , फिरते भी उसकी प्रयत्नशीलता ने विजय पताका लहराया हे। हर बढान के बोझ से कर लेती अपना जीवन भरी , भूमिकाएं निभाती हे वो हे नारी । Written By: Deepika Solanki https://www.facebook.com/deepikasolanki01