रब भी तू हे, सब भी तू हे, में दरिया तू सागर हे। तन भी तू हे,मन भी तू हे, में प्यासी तू गागर हे। तू ममता की सिंधी सोंधी,मंद बयार हे माँ, तू मेरा प्रथम फर हे माँ। प्रेम सुधा बरसाने वाली, तू अनुपम सी मूरत हे, हर विपदा को दूर करे,वो सच्ची निश्छल सूरत हे, सक्छम नहीं में लिखू तुझपे,तू अपार हे माँ, तू ही मेरा प्रथम प्यार है माँ। कृन्दन करती ,जी भर रोती, तुझे पास जब पाव ना, तू जागती थी, सारी रात के,जागकर में दर जाऊ ना, तू मेरी निःस्वार्थ प्रेमी, तू मेरा सारा संसार हे माँ, तू ही मेरा प्रथम प्यार है माँ। जब बचपन में मुझसे,कोई बड़ी सी गलती होती थी, गुस्से में तू मुझे मारकर,फिर चुपके चुपके खिड़ रोटी थी, जब भी ज्यादा नींद लगे तो,में तेरी गोदी में सो जाती थी, हर प्रभात की प्रभा में जागकर माँ आवाज लगाती थी, लहरे भी तू,नाविक भी तू,तू ही पतवार हे माँ, तू मेरा प्रथम प्यार है माँ। Written By:Deepika Solanki Patel